विश्व में परचम लहरा रही हिंदी

मन के भावों को जता रही हिंदी।
साहित्यिक दर्शन करा रही हिंदी।
अपनी हिंदी जोड़ती है दिलों को।
विश्व में परचम लहरा रही हिंदी।


~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’


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