झूठी शान और लालच | Very True Lines

हम स्वार्थ की ज़मीन पर नफरतों का बीज बो रहे हैं।
झूठी शान और लालच में हम रिश्तों को खो रहे हैं।।


~ जितेंद्र मिश्र ‘भरत जी’


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